एकादशी व्रत से ज्ञानेन्द्रियो और कर्मेंद्रियों पर होता है नियंत्रण : पं प्रदीप शास्त्री

गायघाट, बस्ती। रामकथा हमे जीवन जीने की कला सिखाती है तो भागवत कथा हमे मोक्ष प्रदान करती है।श्रीराम कथा की सार्थकता तभी सिद्व होती है जब इसे हम अपने व्यवहारिक जीवन में उतारते हैं। अन्यथा यह कथा केवल मनोरंजन मात्र बनकर रह जाती है। श्रीराम कथा काल्पवृक्ष के समान है।

यह सदविचार अवध धाम से आये कथा वाचक पं प्रदीप शास्त्री ने व्यक्त किया। वे वार को कोरमा गाँव स्थित श्री ब्रम्हदेव बाबा मन्दिर परिसर कोरमा में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा ज्ञान महायज्ञ के सातवें दिन ब्यास पीठ से कथा की अमृतवर्षा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि सिर्फ लक्ष्मी जी की पूजा करने से भक्त के घर लक्ष्मी जी उल्लू की सवारी करके जाती है और भक्त दुर्व्यसन में लिप्त हो जाता है जबकि भगवान विष्णु की उपासना करने पर लक्ष्मी जी गरुण वाहन पर बैठ कर भक्त के घर जाती है। जिससे भक्त धर्मपरायण होकर पैसे को समाजहित में लगाता है। एकादशी व्रत से पांच ज्ञानेन्द्रियाँ, पांच कर्मेन्द्रियाँ और एक मन पर जीव का पूर्ण नियन्त्रण हो जाता है। एकादशी व्रत सबको करना चाहिए। इससे मन व इंद्रियों पर नियंत्रण बढ़ता है। एकादशी के दिन चावल नही खाना चाहिए। एकादशी ब्रत शुक्ल व कृष्ण दोनों पक्ष में रहना चाहिए। ब्रत निराहार सर्वोत्तम, नही तो घी पीकर, नही तो दूध पीकर, नही तो फल खाकर, नही तो दूध रोटी खाकर फिर भी ब्रत न हो सके तो रोटी सब्जी खा लें। गेंहू, अरहर और बाकला अन्न नही है। अन्न केवल सतन्जा होता है। श्रीराम द्वारा धनुष तोड़ने के बाद राजा जनक के महल में आनन्द छा जाता है। वही दरबार में लक्ष्मण और परशुराम में तीक्ष्ण संवाद होता है। श्रीराम के मीठे वचन और मुनि विश्वामित्र के हस्तक्षेप से परशुराम जी श्रीराम को आशीष प्रदान करते हैं। राजा जनक के बुलावे पर राजा दशरथ बारात लेकर जनकपुर पहुंचते हैं। श्रीराम अपने बन्धु बान्धवों के साथ कलेवा खाते हैं। और जनकपुर की सखियां बारातियों को मीठी-मीठी गाली देती हैं।

बच्चों द्वारा भगवान के विवाह की आकर्षक झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केन्द्र रहा।

कथा में प्रमुख रूप से आयोजक पशुपति प्रताप नारायण ओझा, मुख्य यजमान ठाकुर शरण ओझा, जयकरन ओझा, प्रधान अभिषेक पाण्डेय, धर्मेन्द्र पटेल, धर्मेन्द्र चौधरी के अलावा हिमांशू ओझा, मानसी, अंजली, प्रज्ञा ओझा सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *